लगन
ःःःः लगन ःःःः
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प्रेम-प्यार एक लगन,
स्वछंद, बंधन मुक्त, कल्पनाओं की उडान है।
संसार क्या, अगल-बगल का भी न ध्यान है।।
स्वछंद, बंधन मुक्त, कल्पनाओं की उडान है।
संसार क्या, अगल-बगल का भी न ध्यान है।।
प्रेम-प्यार, मान-सम्मान, आन-बान शान है।
निस्वार्थ ढाई अक्षर, प्रेम बह्मांड ज्ञान है।।
प्यार चितचोर, प्रेम फुव्वार नाचता मोर है।
प्यार मन की गहराइयों शांत, बाहर शोर है।।
प्रेम एकाग्र चित, पागलपन की हद है।
मां के आंचल,अतृप्त बच्चे का ध्यान है।।
प्रेम बाज दृष्टि, शेर भूख, विध्यार्थी लगन है।
निश्छल प्रेम, दुनिया की लगी टेडी नजर है।।
ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः
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