धेला. पैंसा

 ःःःः धेला. पैंसा ःःःः

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धेला पैंसौं कि ह्वेगि दुनिया,  
ह्वेगि धेला पैंसौं की सेवा सौंलि,
अंगोठि्या छापू उठणु-बैठणु, 
खाणु-पेणु, बोन-बच्याणु ह्वेगि फैसन।।

पढ़्यां-लिख्यां खोतड़ा खाणा, 
पढ़ै-लिखै सब धरी रैगि,
लंमडेर-नीकजू, खांणै बोदर ह्वेगि,
खाणा भी पोड़िगेन लंगंण।।

धेला पैंसौं कि माया देखा, 
पीठिया भै-बंध भी दूर ह्वेग्या,
मुर्दनी त बात क्या बोन, 
मुख जात्रौ भी वक्त नि रैगि ।।

पता च सभ्यूंं, दगड़ नि जाण कुछ,
फिर भी लगयां च सभि, जमा करण पै,
लूट-खसोट करी, अपणौ भी धोखा देकि,
पैंसा-पैंसा  हाइ पैंसा, कनु पैंसा ह्वे।।

अफु खाण न पेण, न खलौण कै,
जमा करणा जौंकु, सौं भी खांदा उंका,
झूठ कन बोलदा, सभी सूणा,
गौल्या/बच्चों सौं कैमू एक लाल धेला भी।।

    ःःःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः


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