मुझे मालूम नहीं

 ःःःः मुझे मालूम नहीं - MUJHE MALUM NHI ःःःः
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कैसे बताऊं तुम्हें, कितने करीब हो तुम मेरे दिल के ।
दिल की बात बताने का तरीका, मुझे मालूम नहीं ।।

कैसे दिखाऊं, अपने दिल में बसी तस्वीर तुम्हारी ।
है कौन सा आइना दिखाने का, मुझे मालूम नहीं ।।

कैसे समझाऊं तुम्हें, कितना प्यार है हमें तुम से ।
किस तराजू तौलती प्यार दुनिया, मुझे मालूम नहीं ।।

सच है जो मैंने कहा, जो प्यार में तुमनें सुना ।
कहते हैं प्यार भरोसे टिका है, मुझे मालूम नहीं ।।

सच कहूं, तुम्हारे सपने, मुझे कभी आते नहीं ।
एक पल भी तुम, मुझ से जुदा हुए, मुझे मालूम नहीं ।।

कितने अरमान संजोए हैं, मेरे दिल ने तुम्हारे लिए।
तुम्हारे सामने क्यों भूल जाता हूं, मुझे मालूम नहीं ।।

   ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः




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