कवि

    
        ।।।ःःःःकविःःःः।।  

    दर्द दिया होगा इतना, जालिम जमाने ने।
    आंसुओं को नापा होगा, कलम के पैमाने ने।।

        असहाय वेदना से, जब मन छटपटाया।
        सच्चाई बयान की, कागज के आइने ने।।
        कुछ कर गुजरने, बढ़ा ग्लानि भरे मन से।
        रोका होगा कागज पर, उकेरे शब्दों ने।

  दर्द दिया होगा इतना, जालिम जमाने ने।
  आंसुओं को नापा होगा, कलम के पैमाने ने।।

         निर्बलता से उठाने, झकझोरा होगा अर्न्तमन ने।
         ढाल तलवार रूप लिया होगा, कागज कलम ने।।
         रुकती धड़कने सहलाई होंंगी, आती श्वासों ने।
         अस्थिर मन बहलाया होगा, पुष्पगुच्छी शब्दों ने।।

   दर्द दिया होगा इतना, जालिम जमाने ने।
   आंसुओं को नापा होगा,कलम के पैमाने ने।।

           मेमना सा फंसा होगा जब, भेडियों की भीड़ में।
           इन्सान न दिखा होगा कोई, अपनो की भीड़ में।।
           तेरी न सुुुनी होगी,अपनी ही सुना दी अपनो ने।
           कविता बहाई होगी तब,मन के अनछुए भावों ने।।

    दर्द दिया होगा इतना, जालिम जमाने ने।
    आंसुओं को नापा होगा, कलम के पैमाने ने।।

                 ःःःःःः कल्याणसिंह चौहानःःःःः
                           ।।।।।।ःःःः।।।।।।।।

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