बिसिरि गेन
ःःःःः बिसिरि गेन ःःःःः
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बिसिरि गेन भूलि गेन, उ पुरणी बात।
नौ रत्ता मंडांण, बिसिरि गेन, उ पंडौंं की बात।
चैतौ पसरु दर्ज्यूं कू, नि रैन उ पंवंणौं की रात ।।
नी सूणेदा नानि-दाद्दिया, रात्यूं कथा-पखंणा ।
नी सुणेदी गुवैरुवी बंसुलि, घसेरियूं का गीत खुदेड़।।
गोरुवी गोट नी होंद, क्वी नि जणदू कटुला भदाड़।
सत्तु भुजेलू नी बणदू, कंडली बसिंगै भुजि साग।।
घ्यू दूदै पै, अधूड़ि, सेर, हरचिगेन माणी पाथी।
परया, परोठी, कमोलि नी रैन, दोंण, कुलड़ौं की बात।।
बोडा.बोडी,काका.काकी, नी बोलदा जेठि, कंणसी।
जेठु,मंजीलू,कंणसु,ठूला, नी बोलदा दिदा भूली।।
सीसफूल, मुर्खि, बुलाक, नी पैरदा हंसुली खगोली।
कमरबंद, करदोड़, पौंछी, नी जणदा लच्छा झंवौरा।।
ःःःःःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःःःः
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