अजीब- इंसान
।।ःःःः अजीब इन्सान ःःःः।।
ःःःःःःः।।।।।।ःःःःःः
ःःःःःःः।।।।।।ःःःःःः
अजीब तेरी कहानी रे, मूर्ख इन्सान,
चितै आग जांदी, तेरी अकड़ रे इन्सान।।
पैदा होंदू रौंदी तू, हंसदी दुनिया,
अंतिम वक्त चुप तू, रौंदी दुनिया,
जीवन भर करदी तू, बकबक रे इन्सान।।
पैलू कपड़ा पैनी तिन, बिना कीस्सौ लंगोट,
अंतिम कपड़ा उड़ै त्वे, अणसिलू कफन,
जीवन भर लगे तू, कीस्सा भोर रे इन्सान।।
पैदा होंदू बिना सहारौ, चनफिरन से लाचार,
अंतिम यात्रा तेरी, तेरि सांग लगेन कंधा चार,
जीवन भर करदे तू, मैं मैं रे मूर्ख इन्सान।।
होंदू गुड़ौ मिठ्ठू, जांदू खीर खै लोखून,
तेरा होंदू तेरा जांदू, त्वे नवै धुवै लोखून,
भलौ हे राम, बुरौ बला चलगी रे इन्सान।।
पैदा होंदू दुनियौ तेरि, ग्यारह दिनै छूत,
तेरह दिनै मोरदू तेरा, लोखूकू ह्वेगी छूत,
जीवन भर कर दी तू, छुवाछूत रे इन्सान।।
तेरि बरति लोग अगनै, तू पिछनै पिछनै,
मुर्दनी तेरी तू अगनै, लोग पिछनै पिछनै,
सुखौ दगड़, दुःखौ पिछनै दुनिया रे इन्सान।।
ःःःःःःकल्याण सिंह चौहानःःःःः
ःःःःःःःःःःःःःःः
Comments
Post a Comment