नौ- तेरु

 ।।।ःःःः नौ तेरू ःःःः।।।


देखि ज्वा तेरी, स्वांणी मुखड़ी,
मैं अपणी , शुदबुद ख्वै ग्यौं।।

मिली ज्वा त्वै से, नजर मेरी,
मैं आंखी झपझौण, भूली ग्यौं।

आई  ज्व् याद तेेेरी, याद मा तेरी,
मैं दुनियादारी भूली ग्यौं।

मिलण का छणू मा तेरा,
मैं अफी तैं भूली, जड़ ह्वे ग्यौं।

ऐ औणै आहट तेरी,
मैं सब भूली, त्वेमा रमी ग्यौं।

ऐ, हवा ज्वा, तेरा तरफै,
मैं श्वास लेणू, भूली ग्यौं।।

तेरा प्यार मा, जीणू,
मैं जीणू, भूली ग्यौं।

प्यार एक तीस, बुझै नि बुझदी,
मैं प्यारे तीस, पे की हारी ग्यौं।

अजाण दिल दुनिया छोड़ी,
मैं से मैं छोड़ी, तेरू ह्वे ग्यौं।

तेरू नौ मिन, कै मा नि बोली,
बोली लोखून,आखिरी क्षण,
"राम "नाम सत्य ।।  

       ःःःःःःकल्याण सिंह चौहान ःःःः
                   ःःःःःःःःःःःः

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