शंमा


                 ःःः शंमाःःः

न लगाओ इल्जाम शमां पे शरेआम, दिवानो को जलाने का।
दिवाने से पूछो क्यों खुद चले आते हैं,शमां को मिटाने को।।

न बुझी शमां तो जल जाते हैं, शमां को बदनाम करने को।
रंगीन बनाने अपनी महफिल, दिवाने ही जलाते हैं शमां को।।

परवाने एक बार जलते हैं, हर रात जलना पड़ता है शमां को।
न लगाओ इलजाम शमां पे शरेआम, दिवानो को जलाने का।।

      ःःःःःःकल्याण सिंह चौहान

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