पैल्या लोग

 ःःःःः पैल्या लोग ःःःःःः
       ःःःःःःःःःःःःःःः

पैल्या लोग बल आंख्यूं कि शर्मन, मोरजांदा छा ।
अब कै शर्मदार भी बल,नि औंदि एक छींक भी ।।

पैल्या लोग बल, खूब करदा छाई, ठठ्ठा मखोल ।
अब अपणौ दगड़ नि लगौंदु क्वी, हैंसी छूईंबत ।।

पैल्या लोग, मुखड़ि देखी समझी जांदा छा मनै बात।
अब गौला भिंटे-भिंटे भी, सब एक हैका से अजाण ।।

पैलि एक मौ कु पौंणु, होंदु छाई सरा गौं कु पौंणु ।
अब पीठ्या भैबंध भी, सोराभारौं से फुंड गौं लेख ।।

पैल्या लोग चिठ्ठी पौढ़ी, समझी जांदा छा सब बात ।
अब एक कूड़ा रै, भै बंध भी नि जणदा कैकि बात ।।

पैल्या लोग बांटि-च्यूंटी खांदा छा, पैंणैं पकोड़ी भी ।
अबा लोखू  मैं खौं, मेरा खौंन, बाकि क्वी न रौन ।।

पैलि लोग बाटा बटोंयूंं भी पुछदा छा भै-बैणि कै कि।
अब भै-बैणा छोड़ा, सुवैणि-मैस भी बुलौंंदा नौ लेकि।।

       ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः
            ःःःःःःःःःःःःःः

 


Comments

Popular posts from this blog

प्रेम रंगोत्सव

बुढ़ा न बोलो

बड़ै तेरी