एक जनु
ःःःःःः एक जनु ःःःःःः
एक जनू, नि रैण वक्त सदानी।
नी चली, मनमानी कैकि सदानी।। एक जनू....
कभी तीन बेलियू, खांदा खांंणू।
कभी बेलियू नि ह्वे, खाणी पदानी।। एक जनू...
कभी राज रजौड़ौं, का ठाटबाट।
कभी सारु गदनौं, पाणी राणी।। एक जनू...
कभी घ्यू दूदा, बगदा गाड गदना।
कभी नि मीली, चीणा दाणी।।. एक जनू...
रूप रंग नि रै, कै कु सदानी।
पंद्रह पच्चीसी, नि रैण सदानी।। एक जनू...
कभी घाम ठण्ड, कभी बरखा पाणी।
बदुलदु रैदू, मौसम भी सदानी।। एक जनू...
वक्त बदुलदू, वक्त नि लगदू।
नी रैण झौंतु तेेेरी, जमादानी सदानी।।. एक जनू..
कल्याण सिंह चौहान
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