बेटी. ससुराल. मायका

 ःःःः  बेटी. ससुराल. मायका ःःःः
        ःःःःःःःःःःःःःःःः

दिये जिन्हें अपने कलेजे के टुकड़े, उनका घर सम्भालने,
कहते हैं वे लाखों कमियां हैं, तुम्हारी बेटी में गिनाने को।।

मायके रहीं जो परियों सी, उन्हीं का जीवन बन गया कहानी,
न शिकायत की कभी, न तैयार ससुराल के खिलाफ सुनने को।।

हमारी सच्चाई साफ बोलना, बना हिस्सा, बेटियों के जीवन का,
आंगन खुशियों से भरने लगा, बेटियां अच्छी लगने लगी सबको ।।

उन्हें अब हमारे कलेजे के टुकड़े  अपने से लगने लगे हैं।
अब वे भी खुश, वह भी खुश, सजाने में अपने गुलशन को।।


     कल्याण सिंह चौहान 'दिल "



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