बसन्त
ःःःः बसन्त ःःःः
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कोयल गान करे, धरती ने ली अंगड़ाई है।
रंगबिरंगा चोला ओढ़े, ऋतु बसन्त आई है।।
आगमन ऋतुराज का, धरती रतिरूप बौराई है।
फूलों संग भौंरे करेंं ठिठोली, ऋतु बसन्त आई है।।
अलंकृत रस छंद युक्त, कान्हा ने बंसी बजाई है।
पिया मिलन को राधा मचले, ऋतु बसंत आई है।।
भांति.भांति के फूल खिले, भांति. भांति की रंगाई है।
मस्त मौसम हर दिल मस्ती छाई, ऋतु बसंत आई है।।
पीली. पीली सरसों फूली, खेतों फसलें लहराती हैं
देख हर्षित किसान मन हुआ, ऋतु बसंत आई है।।
संचार हुआ नव चेतन का, नव उमंग छाई है।
ठंड नहीं मौसम मे गर्माई है, ऋतु बसंत आई है।।
मिल गाओ फाग सब, ऋतु बसंत आई है।
रंग बिरंगा चोला ओढ़ ,ऋतु बसंत आई है।।
कल्याण सिंह चौहान"दिल"
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