भरोसे का भरोसा

 ःःःः  भरोसे का भरोसा  ःःःः
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भरोसे का भरोसा, भरोसे से तोड़ते हैं लोग।
मतलब को प्यार का, मुखौटा ओड़ते हैं लोग।
अक्सर अपने दुश्मनों से, सतर्क रहते हैं लोग।
इतिहास साक्षी है, अपने ही जहर देते हैं लोग।।

किसीका भरोसा जीतने क्या नहीं, करते हैं लोग। 
लूटने का अहसास भी, नहीं होने देते हैं लोग।
हुनर भरोसा तोड़ने का, कहां से सीखते हैं लोग।
अपनों ने भरोसा तोड़ा, लुट के सोचते हैं लोग।।

दुनिया के दिए घाव, महसूस न हुए अपनों के साथ।
तस्सल्ली से नमक लगा के, दिए जो घाव अपनो ने।
उनकी किसी को न खबर हुई, न कभी खबर होगी।
अपनों की बात बाहर नहीं जाऐंगी, जानते हैं लोग।।

          कल्याण सिंह चौहान

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