लूट गेन

 ःःःः। लूट गेन  ःः
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भरोसू कै जौं पै, अपणु खास जाणी की। 
मूण्डी गेन व्ही हमीं, उल्टु उस्तरा कैरी की।।

भलमनस्यात बुरी हमरी, कि नेत जमनै की।
भलू बुरु भी हमुकू, लीगेंन हमी तैं लूटी की।।

अजणौ पै न, अपणौ पै देखी भरोसू कैरी की।
नि छोड़ी उ घौर, नि पेंदा जख बूंद पाणी की।।

दुःख नी रुप्या जाणौ कू, न धोखा खाणौ कू।
सोच भलमनस्यात छोड़ूं, कि भरोसू करणै की।।

सेवा सौंली भी ह्वेगी अब, केवल धेला पैसौं की।
पुरणौ कु बोल, लगी पठाळ बल पित्र पूजी की।।

       कल्याण सिंह चौहान "दिल"
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