मूर्ख छौं मैं
ःःःः मूर्ख छौं मैं ःःःः
ःःःःःःःःःः
मूर्ख छौं, गंवांर छौं, पागल छौं मैं,
बोलदन मेरा घौरा लोग मैं कु ।।
हर कै पै भरोसु करदौ मैं,
हर कै इमानदार समझदौ मैं,
हर कै अपणु जनू समझदौ मैं,
यु ही मेरू कसूर।।
हर कैसे धोखा खांदु मैं,
हर क्वी छल जांदु मैं,
हर क्वी लूट जांदु मैं,
यू ही मेरू कसूर।।
हर क्वी अपणा जनु लगदु मैं,
हर क्वी विश्वासी लगदु मैं,
हर कैमा मासूमियत दिखेंदी मैं,
यू ही मेरु कसूर।।
क्वी बताउ,
अफरी ईमानदारी किलै छोड़ु मैं,
कै पै भरोसु कन, किलै छोड़ू मैं,
यू ही मेरू कसूर।।
भ्यारा त भ्यारा, अपणा भी लूट जंदन मैं,
अपणा भी धोखा दे जंदन मैं,
यू ही मेरू कसूर ।।
द्वी चार दिनै परेशानी होंद,
फिर क्वी क्या धोखा देलु मैं,
क्वी क्या छललु मैं।।
एक दिन छलणवलु, खुद ही छले जलू,
धोखा खलु अफी सै, बचि भी जलु यदि,
भगवान खुद छलौलु वे,
मैं अपणु भरोसु, ईमानदारी किलै छोड़ू।।
कल्याण सिंह चौहान
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