गुप्त बात

 ःःःः गुप्त बात ःःःः
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भवसागर मन डोले, प्यार की है गुप्त बात। 
प्रेमी या प्रियसी से, होगी अनोखी मुलाकात।।

अलौकिक पिया का, साक्षात दिव्य दर्शन।
उस पल मे, जी जाऊंगा मैं जीवन अनंत।।

शांति से छूट जाऐंगे, माया के रिस्ते बंधन।
सुखदायक  प्रिय का वह, स्नेह आलिंगन।।

साधारण मनुष्य क्या, तपस्वी भी तपरत इनके।
अभिलाषी सब प्रभु दर्शन, मृत्यु वसीकरण के।।

मृत्यु प्रियसी मेरी, करूं तुम्हें प्रेम समर्पण।
प्रभु आराध्य मेरे, करूं अपना मन अर्पण।।

       ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः

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