मेरी हमसफर
ःःःः मेरी हमसफर - MERI HUMSAFAR ःःःः
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तुम कहती हो, मुझे कुछ बताते नहीं,
बताता हूं तो कहती हो, मुझे पता है।।
तुम्हीं मेरा सवाल भी, तो जबाब भी हो।
बिछड़े परिजनों का, तुम संयुक्त रूप हो।।
मेरी हर खुशी, हर सुबह, सांम तुम्ही हो।
दुःख सुख की साथी, राजदार तुम्ही हो।।
मेरी खुशियों को, अपने को भुला बैठी हो।
ईंट पत्थर के मकान को, मंदिर बना बैठी हो।।
दुनिया बहुत नामों से, पुकारती है तुम्हें।
शिव प्रियसी का मन्जू नाम, जचता है तुम्हें।।
ःःः। कल्याण सिंह चौहान। ।ःः
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