कविता है मेरी

 ःःःः  कविता है मेरी ःःःः
       ःःःःःःःःःःःः

गीत.प्रीत.मीत, संगी.साथी, धर्म.कर्म,
पूजा.पाठ, याचना.अर्चना ही.. कविता है मेरी।।

छलके आंसुओं, सूखे होंठों,
कंपकंपाते हाथों की जुबान ही.. कविता है मेरी।।

मेरी वीरांनगी की बहार,
बरसते सावन की तड़फ ही.. कविता है मेरी।।

जो हुआ न किसी का,
वह "दिल" का अपना दर्द ही.. कविता है मेरी।।

मेरे दिन की सोच,
रातों के सपनों की कहानी ही.. कविता है मेरी।।

       ःःःः कल्याण सिंह चौहान"दिल" ःःःः

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