कैसे भुलाऊं
ःःःः कैसे भुलाऊं ःःः
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तुम तो कसमें, वादे, सब भुला के छोड़ चले।
वह प्यारी अनुभूति कैसे भूलूं, जब तुम मिले।।
मेरी हर धड़कन आज भी, तुम्हारा नाम लेती है।
प्यार के वह सुनहरे पल, श्वासें आज भी सेती हैं।।
बादल बरस के गए, धरती कैसे गीलापन छूपाए।
मेरी कोख से उपजे तुम्हारे, फूल को कैसे छुपाएं।।
सूखने को हुआ आंचल, आंसू छलक के भिगो गए।
यादें, जब दो जिस्म, एक जिस्म, एक धडकन हुए।।
अब तुम बरसों न बरसों, आंखें तो बरसा ही करेंगी।
आंखें अब तुम्हें नहीं, तुम्हारा प्रतिबिंब निहारा करेंगीं।।
ःःःः कल्याण सिंह चौहान। ःःःः
atteet bhulaye nhi bgulta. sahcharini/ ptni to bilkul nhi. nice feelings.
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