फूल

 ःःःः  फूल  ःःःः
      ःःःःः

हंसना सीखो, जीना सीखो फूलों से।
खिलता बारिश सावन.भादों की।
सर्दी पूष.माघ, गर्मी बैशाख.जेठ की।।
हंसना सीखो, जीना सीखो फूलों से

झूमना, मुस्कराना सीखो फूलों से।
खुश प्रभु चरण हों, या हो वैश्या घर।
रौंदे पांव, कमी नहीं उसकी खुशबू मे।।
हंसना सीखो, जीना सीखो फूलों से

छेड़े भौंरें चाहे, चुटकी काटै तितली।
झूमता मस्त देख के उनको।
रंज नहीं जरा उसके मन मे।
हंसना सीखो, जीना सीखो फूलों से

उगता कीचड़, पलता कांटों।
लालायित करता हर मन को।
अपनी खुशबू, अपनी छटा से।
हंसना सीखो, जीना सीखो फूलों से

      ःः कल्याण सिंह चौहान ःः

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