सत्य मेव जय
ःः। सत्य मेव जय ःः
ःःःःःःःःःः
पर्वतों से बैठे हैं, भष्ट्र ऊंचे ऊंचे पदों पर,
पेड़ों से चमचे खड़े हैं, कतारों मे।।
ज्वलित कहीं दूर, चमकता उभरता स्वच्छ सा,
निष्ठावान, कर्तव्य परायण, कोई शरीफ,
दिए की लौ की तरह।।
मचती है खलबली, समुद्र में तुफान आने की,
होती है खबर कानोकान, इधर उधर सभी को,
फिर शुरू होता है खेल, नगदम सुविधम लेनदेन,
खरीद फरोख्त, भावताउ, हाटों मे पशुओं की तरह।।
नहीं बेचता वह अपनी, निष्ठा, सज्जन स्वभाव,
खाए देश के नमक को, चंद चांदी के टुकड़ों में,
दौर शुरू होता है नया फिर, आतंकित, भयभीत,
छबि खराब करने का, आते हैं गुंडे तुफानो की तरह।।
देशभक्त, नेक सिपाही नहीं डिगता अपने पथ से,
खड़ा रहता है, अटल सत्य मार्ग पर।।
नीच, दुष्ट, खलकामी टूटने लगते हैं,
रातों में तारों की तरह।।
विजय घोष होता है चारों तरफ,
"सत्य मेव जयते" सूर्य के प्रकाश की तरह।।
कल्याण सिंह चौहान "दिल"
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