बदलाव
ःःःः बदलाव - BADLAV ःःःः
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न जाने क्यों लोग चाहें, बदलाव मुझ में।
अपने पहनावे, अपने तौर तरीकों की तरह।।
मूर्ख गंवांर "दिल", क्या जाने बदलना।
पलपल रंग बदलती, दुनिया की तरह।।
मिट्टी पानी आसमान, न बदला है कभी।
क्यों बदलें, समय किस्मत मौसम की तरह।।
बदलाव अच्छी सोच, मानसिकता का हो।
क्यों बदलें झूठी शान को, दगाबाजों की तरह।।
जानते हैं हम, बदलाव दुनिया का नियम है।
यह भी सच है, सच्चाई न बदली है कभी, झूठ की तरह।।
न जाने क्यों लोग चाहें, बदलाव मुझ में।
अपने पहनावे, अपने तौर तरीकों की तरह।।
ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः
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