मेरु गौं "बकरोड़ा"

ःः मेरु गौं  "बकरोड़ा" ःः
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देवभूमि, खण्ड केदार, देवप्रयाग, पवित्र क्षेत्र।
गौं मेरू, बकरोड़ा, पित्रू की थाती बकरोड़ा।।

खेलणु कुदुणू, बोलण चलणू,
सीखी मीन गौं (बकरोड़ा) की माटी।।

गौं का लोग, मयदु मेरा।
नी जणदा, नी करदा, तेरी मेरी, मेरी तेरी।।

उखड़ि खेतीबाड़ी, फैलासौ बोण।
पुरणौ की निशानी, "चेल" आम डाली।।

पित्रू बकरोड़ा, ब्यूंतौ बसयूं।
पूर्व दिशा सेमूलु डाली, पश्चिम दिशा पीपल डाली।
उत्तर दिशा केमु डाली, दक्षिण दिशा पंयांपाती।।

चमोली कंडाखोली, ढमोंड बंजाखोली।
बकरोड़ा छोटि भूली, मलखोली।
तिनि बैंणी, देवियूं कु रूप।।

झालंदरा, झालीमाली, गौं की देवी।
नागराजा, पित्रू की पूजा होली।।

  ःः। कल्याण सिंह चौहान ःः

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