बडुली मैतै
ःःःः बडुली मैतै ःःःः
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घुटघुट बडुली लगी, ऐगी याद मैतै की।
कख जाण,कैमु जाण, समलौण रैगि मैतै की।।
बस छौंदु ब्बै बुब्बा, मैत होंदु बेटियूं कू।
बाकी खुददै सिवै, क्वी नि पुछदु बेटियूं कू।।
भग्यान न्यूती बुलला, पूजी पठेला बेटियूं कू।
खूब होणि खाणि होली, दुआ फलली बेटियूं की।।
ब्बै बब्बुई कूड़ि जगदि रौ, आश बेटियूं की।
भै भचदौंन डिंडलि, गुठ्यार भोरूंयू रौ गोरु की।।
बेटियूं बुलौंदा छा, ब्यौ काज, देवता पुजै मा।
बेटियूं कु देवी देवता भी अछप ह्वेन, पहाड़ मा।।
एक आंसू दिशा ध्याणियू, काल बिणासौ कू।
दिशा ध्याणियू सत, सत देवी "पारु" कू।।
ःः। कल्याण सिंह चौहान ःः
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