दारु भोरी आंखी
ःःःः दारु भोरी आंखी ःःः
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तेरी दारू भोरी आंखी सुमन,
बणै गैनी शराबी मैं,
बस मा नी मन मेरू, लगीगे लत तेरी मैं।
तेरी दारू भोरी आंखी सुमन,...........
तेरा रसीला होंठ सुमन,
बणै गैनी तिसोलूऊ मैं,
बुझदी नी तीस मेरी, पिलै दे पाणी मैं,
तेरी दारू भोरी आंखी सुमन,........
तेरी स्वाणी प्यारी मुखूड़ि सुमन,
बणै गे उनींदू मैं,
आंख्यूं बसिगे मुखड़ि तेरी, ऐकि सिवै जै मैं,
तेरी दारू भोरी आंखी सुमन,..........
तेरु देखी रंग रूप सुमन,
ह्वेगि बौल्याट मैं, लगदु नी कखि ज्यू मेरू,
अपणि मुखड़ि दिखै जै मैं,
तेरी दारू भोरी आंखी सुमन, बणै गेन शराबी मैं।।
ःः कल्याण सिंह चौहान ःः
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