मुफ्त प्यार

 ःः ‌‌मुफ्त प्यार - ःः
    ःःःःःःः

मुझ को प्यार के सिवाय, कुछ आता ही नहीं।
दुनिया है जिसे, किसी का प्यार सुहाता ही नहीं।।

एक प्यार ही तो है, जिसे हर कोई चाहता है।
अपना गुप्त, व दूसरों का बदनाम चाहता है।।

न जाने क्यों, किस बात पर, नाराज हैं वे मुझसे।
बात करना तो दूर, आंखें चुराने लगे हैं वे मुझसे।।

हम ने जो दिया, समझ वह हमारा प्यार ही तो है।
तुम्हारी चाहत सीमाऐं लांघें, लोभ नही तो क्या है।।

हम लुटे नहीं हैं, हमने तो प्यार मेंं लुटना सीखा है।
प्यार सौगात प्रभु की, तुमने उन्हें भी दिया धोखा है।

    ःः कल्याण सिंह चौहान "दिल" ःः



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