जान हमारी.
ःःःः जान हमारी - JAAN HUMARI ःःःः
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लगाउ हमें उनसे, अपनी जान से ज्यादा हो गया।
सच है हमें, मूल से ज्यादा ब्याज प्यारा हो गया।।
जब तक न देखें उन्हें, न सुनें उनकी मीठी बात।
क्या खोया क्या पाया, लगता है हमें कुछ हो गया।।
खूब फूलें फलें वे, चौमुखी हो उनका विकास।
अपना सब कुछ क्या, ये जीवन भी उनका हो गया।।
एक पल मे उनका रूठ जाना, एक पल मे मान जाना।
हमारे जीवन के जीने की, कड़वी मीठी दवा हो गयी।।
हमारी बगिया की, सुंदर खिलती कलियां हैं वे।
हमारे जीने का, बहुत सुंदर सहारा हो गया।।
ः ः ः कल्याण सिंह चौहान "दिल" ःःःःः
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