मेरी महाभारत

 ःःःः मेरी महाभारत - MERI MAHABHART ःःः
        ःःःःःःःःःः

दोस्ती निभै, गौला लगै कि मौत,
हार पक्की जणदु भी, कर्ण बणी।।

सच बोलदौ,सच्चै दगड़ रैणै करदौ कोशिश,
अपणौ खातिर, सच्चा लवेद भी बोलेन युधिष्ठिर बणी।।

भै-बंद नि भरमैन कभी, अपणा लोभ-लालचौ,
नि बुतेन बीज कभी महाभारता, शकुनि बणी।।

जु कै अपणा बलबूता कै, न कै का बलबूता,
सारु पै कि नि हरै क्वी, कभी अर्जुन बणी ।।

बिना सोच्यां समझयां, कसम नि लेन भीष्म बणी,
अपणौ खातिर मौत स्वीकार करी, अभिमन्यु बणी।।

       ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःः

     

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