प्रेम व धन

 ःःःः प्रेम व धन - PREM V DHAN ःःः
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प्रेम धनी, भौतिक धनवान हो सकता नहीं।
धन मिल भी जाए, संग्रह कर सकता नहीं।।

दो दिलों का पवित्र मिलन, ही तो प्यार है।
आंखों का आकर्षण, प्यार हो सकता नहीं।।

प्यार मे सर्वस्व न्यौछावर कर, लुट जाना होता है।
धन धनी का प्यार, ज्यादा दिन टिक सकता नहीं।।

चंद चांदी सिक्कौं बिके जो, भोग, लोभ लालच है।
ठोकर पे धन दौलत, प्यार से बड़ा हो सकता नहीं।

प्यार धन मोह , किसी का गला घोट सकता नहीं।
प्यार आग तपा, किसीका दिल दुःखा सकता नहीं।।

        ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः


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