मेहंदी च रात

मेहंदी च रात
ःःःःःःःःःः

खुशी च बात, मेहंदी च रात,
खुशनुमा मेहंदी रचणी, ब्यौला ब्यौली का हाथ।।
खुशी च बात, मेहंदी च रात.....

भोल द्वी अजाण, धरी हाथू मा हाथ,
एक हैकै की जान, ह्वे जाला एक साथ।।
खुशी च बात, मेहंदी च रात........

ढोल दमौ बजा, बजा मसकबाजु, डी जे कु साज,
नाचा, कूदा, दगड़ियों दगड़, खुशी की रात।।
खुशी च बात, मेहंदी च रात.....

पुरणौं की रीत, गा मांगल गीत,
जीवनसाथि मिलणू, मिलणू मन कु मीत।।
खुशी च बात, मेहंदी च रात....

बचपन कु दगड़ु, छूटलु घुमचे.घुमचे छुईं बतु खिकत्याट,
शरीर कखि, मन कखि, आंखि पिया बाट।।
खुशी च बात, मेहंदी च रात........

           .....कल्याण सिंह चौहान....

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