भूल जाना अच्छा

ःः ःः भूल जाना अच्छा ःःःः
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पानी पर दिखती तस्वीर, मिटी पानी हिलने के साथ।
दर्पण पर दिखती तस्वीर, आती नहीं किसी के हाथ।
नींद में दिखते सपने खत्म हुए, आंख खुलने के साथ।
भूलना उन्हें अच्छा, बदले जो अपने मतलब के साथ।।

कभी उनकी, हमारी बांहों में बांहें, आंखों आंखों में बात।
मिलना तो दूर, टालने लगे वे अब, हमसे करना भी बात।
दाना चुग, उड़ चले वे, अपने नये ठिकाने की तलाश।
मतलबी अपने मतलब तक ही, किसी के भी साथ।।

हम न टूटे, न बदले, हमने अपने आप को समझा लिया।
साथ बिताए पलों को, हमने जीने का नशा बना लिया।
जानकर भी अनजान बने रहे हम, रिस्ता निभाने को।
मतलबी एक पल मे बदल गए, एक नये बहाने के साथ।।

अपने पन के ये रिस्ते भी यारों, कितने अजीब होते हैं।
मतलबी मौज करते हैं, सच्चे लोग हमेशा ठगे जाते हैं।।

ःःःः कल्याण सिंह चौहान ःःःः

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