प्यार अंधा नहीं
ःः ःः प्यार अंधा नहीं ःःःः
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भीड़ मे गुमसुम, कुछ चंचल सी आंखें।
अकेले में मुस्कराना, हवा से भी बातें।
दिन देखता सपने, करवटें बदलती रातें।
प्यार अंधा नहीं, हैं बचपने की सी आदतें।।
सपनों सा टूटना, बनाई हवाई मंजिलों का।
याद कर कर के भी, याद न आना बातों का।
रूठना मनाना है, छोटी छोटी सी बातों का।
प्यार अंधा नहीं, घर है बचपन की आदतों का।।
बिना सोचे तोड़ लाने, चांद तारों की बातें।
निभे न निभे, साथ जीने मरने की कसमें।
सब झूठ झूठे, स्वयं के सही होने के इरादे ।
प्यार अंधा नहीं, नाम है बचपन की जिदों का।।
ःः ःः कल्याण सिंह चौहान "दिल"
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