चाहत
ःःःः चाहत ःःःः
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एक दूसरे की चाहत को हम, अपनी बनायें।
चाहत की चाहत को, अपनी चाहत बनायें।।
मैं तुम्हें, तुम मुझे, अपने प्यार की चाहत बनाओ।
मैं, न तुम, प्यार की चाहत के सिवाय कुछ चाहें।।
अपनी चाहत, हर चाहत की, चाहत की पूजा हो।
समर्पण की चाहत के सिवाय, न कोई चाहत हो।।
चाहत हमारे दो शरीरों की, एक प्राण हो जाये।
हमारे दिलों की चाहत, एक धड़कन हो जाये।।
धड़कन किस दिल की है, न समझ आये।
मेरा दिल तुम्हारा, तुम्हारा दिल मेरा हो जाये।।
ःः कल्याण सिंह चौहान "दिल"
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