सूखा गुलाब
सूखा गुलाब
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एक पड़ाव प्यार के,
एक प्राण, दो शरीर, दूर हो गए।
संदेश भी बंद, कि उम्र नहीं प्यार की,
लोकराज दुनिया की, प्यार है गुनाह।
मेरा प्यार, प्रेमियों की किताबों में रखा,
सूखा गुलाब हो गया।।
तोड़ के "दिल" पुष्प किसी और के,
प्यार में पुष्प गुच्छ हो गई।।
#### कल्याण सिंह चौहान "दिल"
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