ढलती उम्र

।।‌- ढलती उम्र-।।
::::::::::::::::::::

बीती जवानी, देखते/मिलते उसे,
भाव न जगा कभी, कोई मन में।

अनजाने/अचानक किसी के प्रति,
देख निस्वार्थ सेवा भाव उसका।

उम्र के ढलते पड़ाव, मन में उथल-पुथल हो,
" दिल" की कली, सुमन हो खिल गई।।

          :::: कल्याण सिंह चौहान " दिल":::::



Comments

Popular posts from this blog

प्रेम रंगोत्सव

बुढ़ा न बोलो

बड़ै तेरी