छुपाए जा रहे हो
:: छुपाए जा रहे हो ::
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उठ/चल रहा है जो तुफान, तुम्हारे मन में।
है क्या वह, जो दिल में दबाए जा रहे हो।
साकार होगा बताओ कैसे, मन ही मन में।
कुछ कहो तो, जो मन में छुपाए जा रहे हो।।
इस ज़माने में, किसी के दबाए दबता है कौन।
दबाए जाने वाले से ज्यादा, उभरता है कौन।
जो बात कल खुलके सामने आएगी, दुनिया में।
क्यों बेवजह, उसे अपने सीने में दबा रहे हो।।
लिखने वाले ने क्या लिखा, लिखने वाला जाने।
पढ़ने वाले ने क्या पढ़ा, पढ़ने वाला ही जाने।
सुनने वाले ने क्या सुना, सुनने वाला ही जाने।
सबके अर्थ/मतलब एक से हों। यह प्रभु जाने।।
:: कल्याण सिंह चौहान "दिल"::
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