चाय पूज्य
:::: चाय पूज्य::::
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चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च।
कप भोरी जख मूं मिल जाऊ, वखी मू शुभ काज च।।
चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च।
मैं कू चुल्हू हवन कुण्ड, चुल्है लखड़ी हवन लखड़ी च।
कितली प्रसादौ भांडू, कितली उमल्दी चाय प्रसाद च।।
चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च।
गर्म- गर्म चाय देखी की, मन मेरु रमसौंदू।
घुट एक घूंट पे, ज्यू मां प्राण सी ऐ जांदू च।।
चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च।
इंसाना सोलह संस्कारूं, चाय कू ही बोलबालू च।
चाय नि पूछा त बोलदन, चाय की भी औकात नी च।।
चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च।
क्वी भी हो कामकाज, खाणू-पेणू, छुंईं-बथ बादै बात।
रिवाज पैली चाय की प्याली, अब त यूं ही संस्कार च।।
चाय भग्यान पूज्य मेरी, सब जगह चाय कू राज च।
## कल्याण सिंह चौहान "दिल" ##
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