ऋतु तीन

 ## ऋतु तीन ##

बारह मैनौं की, गर्मी सर्दी वर्षा ऋतु मा ह्वे बंटाई।
बसन्त ग्रीष्म, बरखा शरद, हेमन्त शीत उप ऋतु होई।।

फुलेरा चैत-बैशाख, सतरंगी चदरी ओडै धरती।
हंसदु-खेलदु मदमस्त, ऋतु राज बसन्त छाई।।

तपदा जेठ-अषाड़, सुखदा होंठ तड़फदा प्राणी।
त्राहि-त्राहि मचै, ऋतु ग्रीष्म आग बरसौंदु आई।। 

सौणै स्वाती, भादौं राती, धरती तीस बुझौणू।
ऋतु राणि बरखा, झमाझम बरखदी धाई।।

असूज-कातिक उमस भोरियां दिन, जाणू कू।
कुरकुरया ठंड औणा का बीच, ऋतु शरद आई।।

ओंसै सफेद चदरी, मंगसीर-पूष धरती छाई।
जगदी आग, ऊनी कपड़ा, ऋतु हेमन्त सुहाई।।

मौ-फागुन ह्वे हिंवळी, बोलदन पोड़ि गेंहुवळी।
चसू हड्डिगियूं, ठिठुरदा गात, ऋतु शीत/शिशिर आई।।

बारह मैनें की, गर्मी सर्दी वर्षा ऋतु मा ह्वे बंटाई।
बसन्त ग्रीष्म, बरखा शरद, हेमन्त शीत उप ऋतु होई।।
              ## कल्याण सिंह चौहान "दिल"

नोट:- बसंत पंचमी मौ महीने में आती है। मौसम में भी बहुत बदलाव हो रहा है।


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