को-वा
## को-वा ##
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अपणु सी, नि रैन, मन मेरू, ह्वे ग्याई, बिराणू सी।
अनमनि भांति, रम ग्याई, व्हीं मा ही।।
अपणु सी, नि रैन, मन मेरू, ह्वे ग्याई, बिराणू सी
आंख्यूं मा, फोटो व्हीं की, सुपन्या भी व्हीं का ही।
हर वक्त, सोच व्हीं की, ख्याल भी, व्हीं का ही।।
अपणु सी, नि रैन, मन मेरू, ह्वे ग्याई, बिराणू सी
औंदु-जांदु, खांदु-पेंदू,नजर औंदी,
भ्रमणा भी, व्हीं का ही।
दु:ख-दर्दै वा, दवे-दारू, हंसी-खुशी भी, वा ह्वे ग्याई।।
अपणु सी, नि रैन, मन मेरू, ह्वे ग्याई, बिराणू सी
को वा, मेरी, सूण जमाना, देख जमाना,
जान प्यारी, मेरि बेटी, ह्वे ग्याई।
अपणु सी, नि रैन, मन मेरू, ह्वे ग्याई, बिराणू सी।
## कल्याण सिंह चौहान #दिल" ##
नोट- बेटियों व बेटियों के माता-पिता को समर्पित।
निवेदन है आप अपनी टिप्पणी जरूर लिखें।
दिल से आपका धन्यवाद 🌹🌹🙏
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