मेरे कतरों की बात

 " मेरे कतरों की बात"

तेरे प्यार में बिखरे, 
मेरे कतरों की बात, जमाना गीतों में गाएगा।
एक संगदिल को, ज़माना पिघलते देखेगा।।
दुनिया के तानों/लांक्षणो में तपकर मेरा प्यार,
सोने पे सुहागा सा सुहायेगा।।

पुरानी आदत है दुनिया की,
पुराने रिस्ते भूल के, नये रिस्ते बनाने की।
नये रिस्ते में बंध कर, तुम भी मुझे भूल जाओगे,
तेरे प्यार की यादें, दिल में संजोकर मैं,
मस्त दुनिया की खाक छानूंगा।।

दुनिया में गलतफहमी है, गलतफहमी से,
तुम्हें भी गलतफहमी है, मैं तुम्हारे लिए लिखता हूं।
गलतफहमी छोड़,
सच मान मैं तुम्हारे लिए ही लिखता हूं।।

कभी मुझे देखो, या हाल सुनो मेरे,
तो आंसू न बहाना।
तुम्हें उदास देख, मेरा दर्द छलका तो,
मेरा प्यार बदनाम हो जायेगा।।

खुद जलके, दूसरों को जलाके,
कालिख बन कर क्या फायदा।
बात तो तब बने, जब प्यार का पतंगा,
प्यार की लौ में जलके, प्यार में ही शमा जाए।।

तुम्हारी खुशी के लिए कितने समझौते किए मैंने,
तुम क्या जानो।
मैं खुश हूं, ये गलतफहमी भी सहन न हुई तुम से।।
मैं प्यार की पहली अनुभूति के सहारे जिए जा रहा हूं,
हर पल तुम्हारी खुशी के लिए प्रार्थना किए जा रहा हूं।।

कल्याण सिंह चौहान "दिल"

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