राजी

 "राजी"
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तु हां मा भी राजी, ना मा भी राजी,
मजाक मा भी राजी, सज्जाक मा भी राजी।
सुख मा भी राजी, दुःख मा भी राजी,
तु हर धाणि मा राजी राजी।।
 
त्वे जणुणु, समझुणू, कथगा खपौंणू मुण्ड कपाळ,
कुछ समझ नि औंणि, कुछ पल्ला नि पौंड़णू। 
त्वे क्या समझूं, त्वे क्या जाणू, तु हर धाणि मा राजी राजी।।

हैंसदि मुखड़ियू दुख दर्द, आंख्यूं रुकियूं उमाळ,
भवस्यौंदा दिलौ बवंडर, त्वी जाणी,
बाकी क्वी क्या जाणू , तु हर धाणि मा राजी राजी।।

शिव चरणू, नतमस्तक छौं आज,
दुःख दर्द मिटौन तेरा, खुशियों कि हो बहार।
हर कैसे मिलु त्वे, प्यार ही प्यार,
बाकी क्या मांगु त्वेकु, तु हर धाणि मा राजी राजी।।

          कल्याण "दिल"

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