द्विविधा दिलै

 द्विविधा दिलै
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कै नौ, कै नाता बुलौंउ त्वे,
कै नौ, कै नाता लिखुं त्वे,
क्या बोंलुं त्वे, द्विविधा मां छौं मैं।।

जै नौ बुलौं, जै नाता छापुं त्वे,
वे नौ, वे नातै भौत मेरा गौं/ मेरा मुलुक,
क्या बोंलुं त्वे, द्विविधा मां छौं मैं।।

सुणी मेरि बात, पौढ़ी मेरा बोल,
क्वी देदिन गाळि, क्वी करदिन आंख्यूं सान मैं,
क्या बोंलुं त्वे, द्विविधा मां छौं मैं।।

काळै सान काळु जाणु, प्यारौ इसरु जाणु प्यार,
दिलै बात दिल जाणु, बाकी क्वी क्या जाणू यार,
क्या बोंलुं त्वे, द्विविधा मां छौं मैं।।

राम जी कु गुप्त शब्द "प्रिय"बतै,
हनुमान जी ने पछाणौ, सीता जी तै,
प्यारौ नौ, प्यारौ इसरु, तु जाणि या जाणु मैं,
बाकी क्वी क्या जाणू यार।
क्या बोंलुं त्वे, द्विविधा मां छौं मैं।।

          कल्याण सिंह चौहान "दिल"

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