तुम न सही
"तुम न सही"
न मर्यादा बोली-भाषा की, न था शब्द-अर्थ का ज्ञान,
प्यार से पहले, कागज-कलम से भी, था मैं अंजान,
"दिल", कागज, कलम मित्र हुए, है तुम्हारा अहसान।।
तुम न सही, कोई और सही, कोई और सही ---
कसूर बताए बिना, अचानक चौराहे छोड़ने वाले,
ठीक कहा किसी ने, तुम न सही, कोई और सही,
तुम्हारी बेरुखी, और कलम मेरी सहेली हो गई।।
तुम न सही, कोई और सही, कोई और सही ---
चोरी छिपे बात/ मुलाकात/ वासना से प्यार बदनाम,
है अमर प्रेम, बिन चाह, आत्म मिलन खुले आसमान,
तुम्हें ही, लिखता हूं तुम्हें, बिना लिए तुम्हारा नाम।।
तुम न सही, कोई और सही, कोई और सही ----
एक कड़वी सच्चाई यह भी है, मेरे जीवन में,
झूठ है, तुम्हारे सिवाय कोई नहीं, मेरे जीवन में,
सच्ची-पक्की सहेली है, मेरी मौत, मेरे जीवन में।।
तुम न सही, कोई और सही, कोई और सही ---
सच कहूं, यह भी एक सच्चाई है, मेरे जीवन में,
तुम्हारा रूठना-मनाना, एक हिस्सा था, मेरे जीवन में।
बिछड़े जो, तुम्हारी यादों के कुछ नहीं, मेरे जीवन में।।
तुम न सही, कोई और सही, कोई और सही ---
# कल्याण सिंह चौहान "दिल"#
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