बुढ़या/बुढ़ीड़ न बोला
बुढ़या/बुढ़ीड़ न बोला
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बुढ़या/ बुढ़ीड़ न बोला मैं कु, अभी त मैं ज्वान छौं।
कूड़ी पै गबयूं ढुंगू , द्वार पटेलौं दगड़ मालद्वार छौं।।
नौन्यालूं दगड़ नौन्याल, ज्वन्वी दगड़ ज्वान छौं।
बुढ़ियों दगड़ छ्वालि गत्यू , दिल कु ज्वान छौं।।
कै का दिल बस्यूं , कै अपणा दिल बसयूं छौं।
कथगि राज जिकुड़ि मेरी,अफ्फु भी एक राज छौं ।।
इनि उनि न समझा, औंला दाणियूं स्वाद छौं।
खारा दबीं आग, खुंटि टंकीं धारदार तलवार छौं।।
कुटरि ब्यूंतै मैं, काकर बुजेड़ि धरियूं बीज छौं।
मुलेजेदार मैं, कै कु छी छी कै कु मान सम्मान छौं।।
कल्याण सिंह चौहान "दिल"
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