रास्ते का पत्थर

 रास्ते का पत्थर 
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कभी रुका करो, ठहरा करो।
रास्ते पर पड़े, पत्थरों के पास।

कोई इन से ठोकर खाकर, 
संभलकर चलने की कला सीख,
जीवन में ऊंचाइयां पा गया।

कोई अपनी मौज में इन्हें ठोकर मार के,
परेशानियों को अपने साथ ले गया।

   कल्याण सिंह चौहान "दिल"


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