दिल के पास

 दिल के पास 
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दिल मेरे दिल के दिल का, अटूट विश्वास है।
जितनी दूर मुझसे, उतने ही दिल के पास है।।

दिल, दिल के दिल की, बस यही चाहत है।
सिवाय तुम्हारे प्यार के, न कोई चाहत है।।

दिल को दिल की गहराइयों से, तुम्हें प्यार है।
पता नहीं तुम्हारे सिवाय, कहीं और भी प्यार है।।

दिल के दिल की दिल से, हुई दिल्लगी दिल से।
 दिल, दिल के दिल की दिल, आए पास दिल से।।

प्यार की राह में दो दिल, खिल के मिले दिल से।
दो दिल, एक जान, हमराज, हमदर्द हुए दिल से।।

          कल्याण सिंह चौहान "दिल"

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