भाव मन के
भाव मन के
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उमड़/चल रहा है, जो भाव तुम्हारे मन में।
है क्या वह, जो दिल में दबाए जा रहे हो।
साकार होगा कैसे, मन ही मन में बताओ।
बताओगे तो हल होगा, जो छुपाए जा रहे हो।।
इस जमाने में, किसी के दबाये, दबता कौन है।
दवे/कुचले गए से ज्यादा, भला उभरता कौन है।
जो बात कल खुल के, सामने आएगी दुनिया में।
क्यों उसे सीने में, जबरदस्ती दबाये जा रहे हो।।
कल्याण सिंह चौहान "दिल"
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